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छत्‍तीसगढ़ राज्‍य का नाम छत्‍तीसगढ़ क्‍यों पड़ा ?

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छत्‍तीसगढ़ का इतिहास अत्‍यंत गौरवशाली है। जैसे-जैसे छत्‍तीसगढ़ विकास का शिखर की ओर बढ़ रहा है, वैसे ही इस राज्‍य की इतिहास की जिज्ञासाएं देश और दुनिया का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है। 01 नवम्‍बर 2000 को अपनी मातृराज्‍य मध्‍यप्रदेश से अलग होकर छत्‍तीसगढ़ देश का 26 वां राज्‍य बना। छत्‍तीसगढ़ राज्‍य बनने से पहले ही इस अंचल का नाम छत्‍तीसगढ़ हो गया था। छत्‍तीसगढ़ अंचल का नाम छत्‍तीसगढ़ क्‍यों पड़ा इस संबंध में विभिन्‍न विद्वानों ने भिन्‍न भिन्‍न मत दिए हैं :- ब्रिटिश इतिहासकार जे.बी. बेगलर के अनुसार इस क्षेत्र का वास्‍तविक नाम छत्‍तीस घर था न कि छत्‍तीसगढ़। जरासंध ने राज्‍य क्षेत्र के दक्षिण की ओर 36 दलित परिवारों ने जिस क्षेत्र को बसाया, उस क्षेत्र को छत्‍तीस घर कहा गया। जो बाद में

छत्‍तीसगढ़ के एडवेंचर और पिकनिक स्‍पाट

छत्‍तीसगढ अपनी प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण है। छत्‍तीसगढ़ का अधिकांश हरे भरे वनों से भरा हुआ है। यहां हरे भरे पहाड़ एवं वादियां हैं। यहां कहीं कल-कल करते झरने हैं, तो कहीं स्‍वच्‍छंद रूप से विचरण करते वन्‍य प्राणी है। पक्षियों की चहचाहट को मन को प्रसन्‍न कर देती है। ये स्‍थान हैं छत्‍तीसगढ का शिमला मैनपाट और जीव अभारण्‍य बारनवापारा। ये खूबसुरत जगह पर्यटकों एवं सैलानियों का ध्‍यान अपनी ओर खिंचती है। ये स्‍थान एडवेंचर एवं पिकनिक के लिए सर्वोत्‍तम जगह है।
बारनवापारा (वन्‍य जीव अभारणय )       बारनवपारा एक वन्‍य जीव अभारण्‍य है, जो कि छत्‍तीसगढ़ राज्‍य के बलौदा बाजार जिले में स्थित है। इस अभारण्‍य का नाम इस अभारण्‍य के मध्‍य में स्थित दो वन्‍य ग्राम बार और नवापारा के नाम पर पड़ा। यह अभारण्‍य 1976 में असतित्‍व में आया। इस अभारण्‍य का संपूर्ण्‍ क्षेत्रफल 244.66 वर्ग किलोमीटर है।        यहां सभी वन्‍य जीवों को उनके प्राकृतिक निवास में स्‍वच्‍छंद

छत्‍तीसगढ़ के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्‍थल

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छत्‍तीसगढ़ में अनेक एतेहासिक एवं पुरातत्विक स्‍थल है, जो पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्‍वपूर्ण है। ये छत्‍तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास को बयां करते हैं। यहां सिरपुर नामक स्‍थान हैं जहां भगवान बुध्‍द आये थे तथा सम्राट अशोक ने स्‍तूप भी बनवाया था। डीपाडीह नाम स्‍थान पर खुदाई करने से अनेक मंदिर प्राप्‍त हुए हैं। इस स्‍थान से शाक्‍य एवं शैव समुदाय के पुरातत्वि अवशेष प्राप्‍त हुए हैं। यहां भोरमदेव नामक मंदिर हैं, जिसकी समानता के खजुराहो के मंदिर से की जाती हैं। मल्‍हार में ताम्रकाल से लेकर मध्‍यकाल तक का क्रमबध्‍द इतिहास प्राप्‍त हुआ है। देवबलौदा दुर्ग में प्राचीन शिव मंदिर है। तालागांव में देवरानी – जेठानी मंदिर है जो गुत्‍पकाल की स्‍थाप्‍य कला का बोध कराती है। बारसूर नामक स्‍थान विशालकाय गणेश प्रतिमा के लिए जानी जाती हैं। यहां छिंदक नागवंशी का शासन रहा है। आओं इन सभी सथानों के बारे में जानें।सिरपुर (समृध्दि की नगरी)       सिरपुर का प्राचीन नाम श्रीपुर है, जिसका अर्थ होता है समृध्दि की नगरी। सिरपुर को चित्रांगपुर भी कहा करते थे। महाभारत काल में